नए शिक्षण सत्र की शुरुआत के साथ ही दुर्ग जिले के सरकारी स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अब्दुल गनी सहित कई पूर्व जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर जर्जर शाला भवनों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने शासन से पुराने भवनों के संधारण, नए स्कूल भवनों के निर्माण और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिले के कई सरकारी स्कूल भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में हैं। उनका कहना है कि हाल ही में भिलाई के वृंदा नगर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला के एक कक्ष की छत का हिस्सा गिरने की घटना ने स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। उन्होंने मांग की कि जिले के सभी पुराने स्कूल भवनों का तकनीकी परीक्षण कराया जाए और जहां भी आवश्यकता हो, वहां तत्काल मरम्मत या अन्य आवश्यक कदम उठाए जाएं।
पूर्व जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में ऐसे शाला भवन हैं जिन्हें अनुपयोगी (कंडम) घोषित किया जा चुका है। उनके अनुसार, इन भवनों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है, जिससे कई स्कूलों में कक्षाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। उनका कहना है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।


विज्ञप्ति में यह भी मांग की गई है कि नए स्कूल भवनों के निर्माण तक विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो और वे सुरक्षित वातावरण में अध्ययन कर सकें।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अब्दुल गनी के साथ देवकुमार जंघेल, लिखन साहू, अमृत लोढ़ा, संजय सिंह, भोला महोबिया, मनोज चंद्राकर, मनीष यादव, डॉ. छत्रसाल गायकवाड, राजकुमार वर्मा और युवराज ठाकुर सहित अन्य पूर्व जनप्रतिनिधियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।

