जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के महामंत्री श्री राहुल शर्मा ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर अतिथि शिक्षकों और शिक्षा के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों की भाजपा सरकारों को “शिक्षक एवं शिक्षा विरोधी बताया।

श्री शर्मा ने कहा कि नियमितीकरण और सिविलियन की अपनी जायज मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक संघ पिछले 23 दिन से हड़ताल पर बैठे थे। किंतु छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार और उनके नुमाइंदों ने उनकी सुध तक नहीं ली।

भाजपा के घोषणा पत्र में वादा था कि सरकार बनने के 100 दिन के अंदर अतिथि शिक्षकों की मांग पूरी की जाएगी। सत्ता में आने के बाद भाजपा अपने वादों को भूल गई। यह भाजपा की पुरानी आदत है।

शांतिपूर्ण हड़ताल पर बैठे शिक्षकों पर दमनकारी नीति अपनाई गई। पुलिस प्रशासन द्वारा उनके टेंट उखाड़ दिए गए और उन्हें मानसिक प्रताड़ना दी गई, जो अत्यंत निंदनीय है। सरकार को चाहिए था कि शिक्षकों से बात करे, स्थाई नीति बनाकर उनका भविष्य सुरक्षित करे। तत्काल वार्ता कर नियमितीकरण व मानदेय की मांगों का समाधान किया जाए।

श्री शर्मा ने कहा कि “शिक्षा के मंदिर को बचाने वाले गुरुजनों पर तानाशाही और अत्याचार की जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार को भी घेरा। कहा कि NEET परीक्षा लीक होने के कारण लगभग 20 लाख छात्रों को अपनी पढ़ाई से हाथ धोना पड़ा। दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज छात्र जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। केंद्र की बेरहम सरकार ने छात्र-छात्राओं पर बेरहमी से लाठीचार्ज कर उन्हें लहूलुहान कर दिया।

इस घटना में एक छात्र की जान भी चली गई। नैतिकता के आधार पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा दे देना चाहिए, लेकिन सत्ता लोलुप भाजपा सरकार ने ऐसा नहीं किया राहुल शर्मा ने कहा कि इससे साबित हो गया है कि केंद्र और राज्य दोनों की भाजपा सरकार शिक्षा एवं शिक्षक विरोधी हैं। इन्हें जल्द उखाड़ फेंकना जरूरी है, तभी हमारा देश शिक्षित होगा और आगे बढगा।