नागरिक अधिकार रक्षा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता राजकुमार गुप्त ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र भेजकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से राजनीतिक दलों के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था चुनाव की निष्पक्षता और समान अवसर के सिद्धांत को प्रभावित करती है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि चुनाव मूलतः प्रत्याशियों के बीच होने वाली लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में ईवीएम पर केवल प्रत्याशी का नाम, फोटो अथवा चुनाव चिह्न ही प्रदर्शित होना चाहिए। उनका तर्क है कि कोई भी राजनीतिक दल न तो मतदाता होता है, न प्रत्याशी और न ही किसी प्रत्याशी का प्रस्तावक, इसलिए ईवीएम पर राजनीतिक दलों के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न प्रदर्शित किए जाने का औचित्य नहीं है।
राजकुमार गुप्त ने आरोप लगाया कि आयोग द्वारा ईवीएम में राजनीतिक दलों के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न शामिल करने से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के बीच असमानता की स्थिति उत्पन्न होती है। उनके अनुसार इससे कुछ राजनीतिक दलों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की भावना प्रभावित होती है।


पत्र में यह भी कहा गया है कि कई बार मतदाता किसी विशेष प्रत्याशी को वोट देना चाहता है, लेकिन संबंधित राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करता। ऐसी स्थिति में ईवीएम पर दल का नाम और चुनाव चिह्न होने से मतदाता भ्रम या दुविधा की स्थिति में आ सकता है।
नागरिक अधिकार रक्षा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम से राजनीतिक दलों के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न हटाकर केवल प्रत्याशी से संबंधित जानकारी ही प्रदर्शित की जाए।

