र्ग जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत चिंगरी के बहुचर्चित मत्स्य पट्टा प्रकरण में पंचायत विभाग की जांच पूरी होने के बावजूद मत्स्य पालन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत ने अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सरपंच और सचिव की भूमिका को नियमों के विपरीत मानते हुए कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है, लेकिन दूसरी ओर मत्स्य विभाग की जांच और जवाबदेही अब भी फाइलों में अटकी दिखाई दे रही है। मामले की शुरुआत 12 जनवरी 2026 को हुई शिकायत से हुई थी, जब शिकायतकर्ता गुलाब देशमुख ने कलेक्टर जनदर्शन और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कर पंचायत एवं मत्स्य पालन विभाग दोनों से जांच की मांग की थी।

जनपद पंचायत दुर्ग द्वारा कराई गई जांच में वरिष्ठ आंतरिक लेखा परीक्षक आई.पी. नागदेव ने 16 फरवरी 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए तत्कालीन सरपंच चंद्रभान बंजारे और तत्कालीन सचिव कुलेश्वर साहू के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की।रिपोर्ट में उल्लेख है कि वर्ष 2018 में करीब 9 हेक्टेयर क्षेत्र के पांच तालाबों का सात वर्षों के लिए पट्टा सक्षम प्राधिकारी (कलेक्टर) की अनुमति के बिना जारी किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पट्टा उस समय दिया गया जब मामला न्यायालय में विचाराधीन था। जांच में निस्तार हेतु तालाब सुरक्षित रखने के दावे की पुष्टि नहीं हुई तथा सहकारी समिति को प्राथमिकता देने के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने और पट्टा राशि निर्धारण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में संभावित राजस्व हानि की आशंका भी व्यक्त की गई है।

मत्स्य विभाग पर उठ रहे सवाल
जहां पंचायत विभाग ने अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है, वहीं शिकायतकर्ता का आरोप है कि मत्स्य पालन विभाग अब तक केवल पत्राचार तक सीमित है। उनका कहना है कि विभाग यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि संबंधित तालाबों की वास्तविक लीज राशि कितनी थी, पंचायत को कितना भुगतान हुआ और उसका पूरा लेखा-जोखा क्या है।
2018 के पत्राचार के बावजूद कार्रवाई नहीं
शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्ष 2018 में इस मामले को लेकर उप संचालक कार्यालय से मत्स्य निरीक्षक को कई पत्र जारी किए गए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि विभाग को मामले की जानकारी थी। इसके बावजूद अब तक किसी संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

अब सबसे बड़ा सवाल
जनपद पंचायत ने अपनी जांच में पंचायत स्तर की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कार्रवाई केवल पंचायत प्रतिनिधियों तक सीमित रहेगी, या फिर पूरे प्रकरण में मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी?
शिकायतकर्ता ने दी चेतावनी
शिकायतकर्ता गुलाब देशमुख का कहना है कि यदि जनपद पंचायत की जांच रिपोर्ट के बाद भी संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करता, तो वे मामले को उच्च स्तर पर उठाएंगे और उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लेंगे। फिलहाल पूरे मामले में जिला प्रशासन और मत्स्य पालन विभाग के अगले कदम पर नजरें टिकी हैं। पंचायत की जांच पूरी होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ती है या मामला फिर लंबे समय तक केवल फाइलों और पत्राचार तक ही सीमित रह जाता है।

