छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक परिदृश्य के बीच बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश डॉ. प्रेमासाई जी महाराज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सौजन्य भेंट कर प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की। मुलाकात के दौरान महाराज ने साय सरकार के सुशासन, सांस्कृतिक संरक्षण और धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम जैसे फैसलों की खुलकर सराहना की।

डॉ. प्रेमासाई महाराज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धर्म, संस्कृति और विकास के समन्वय से सकारात्मक वातावरण निर्मित हो रहा है। उन्होंने धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम को सांस्कृतिक अस्मिता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मुलाकात के दौरान प्रेमासाई महाराज ने अपने हालिया बस्तर प्रवास के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि जो बस्तर कभी नक्सल हिंसा की चुनौतियों के कारण चर्चा में रहता था, वहां अब विकास, शांति और जनविश्वास का माहौल दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित दिव्य दरबारों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सामाजिक और आध्यात्मिक जागरण का संकेत है।

सीएम ने भी की संत के कार्यों की सराहना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रेमासाई महाराज द्वारा धर्म, संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। दोनों के बीच प्रदेश के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
कुनकुरी में होगा पांच दिवसीय दिव्य दरबार
मुलाकात के दौरान कुनकुरी में प्रस्तावित पांच दिवसीय दिव्य दरबार और दो दिवसीय ‘हिंदू जगाओ पदयात्रा’ की जानकारी भी साझा की गई। आयोजन के तहत गांव-गांव में देवगुड़ी स्थापना और लोगों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा।

राजनीतिक संदेश भी तलाशे जा रहे
राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को केवल धार्मिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं मान रहे हैं। आदिवासी अंचलों, विशेषकर बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक जागरूकता से जुड़े अभियानों के बीच इस मुलाकात को सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे आयोजनों का प्रभाव आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है।

