आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई कथित घटिया गुणवत्ता की साड़ियों को लेकर प्रदेशभर में उठे विरोध और सवालों के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने बड़ी प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। अब साड़ियों की केंद्रीकृत खरीदी नहीं होगी, बल्कि निर्धारित राशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, ताकि वे अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार स्वयं साड़ी खरीद सकें।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए संचालनालय स्तर पर वर्षों से चली आ रही केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की है। विभागीय सूत्रों के अनुसार हाल के महीनों में साड़ी खरीदी की गुणवत्ता, चयन प्रक्रिया और वितरण को लेकर लगातार शिकायतें सामने आई थीं। कई स्थानों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साड़ियों की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई थी, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना।

विवाद के बाद बदली व्यवस्था
जानकारों का मानना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर उस विवाद के बाद लिया गया है, जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कम गुणवत्ता वाली साड़ियां वितरित किए जाने का आरोप लगाया था। विपक्षी दलों और कर्मचारी संगठनों ने भी खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। बढ़ते दबाव और असंतोष के बीच सरकार ने व्यवस्था बदलने का फैसला किया।
डीबीटी मॉडल पर जोर
मंत्री राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पारदर्शी शासन व्यवस्था की सोच के अनुरूप अब राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और हितग्राहियों को अपनी पसंद का चयन करने का अधिकार मिलेगा।

रंग और डिजाइन रहेगा एक
विभाग ने स्पष्ट किया है कि साड़ी का रंग और डिजाइन विभागीय स्तर पर तय किया जाएगा और इसकी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी, ताकि पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहे। हालांकि कपड़े की गुणवत्ता और खरीद का निर्णय स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता और सहायिकाएं कर सकेंगी।
500 रुपए प्रति यूनिफॉर्म की राशि
भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है। प्रत्येक यूनिफॉर्म के लिए अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित है। अब यही राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे खातों में जमा की जाएगी।

विवादों से लिया सबक
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल खरीद व्यवस्था में बदलाव नहीं, बल्कि हालिया विवादों से सबक लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश भी है। हालांकि यह भी देखने वाली बात होगी कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद गुणवत्ता, एकरूपता और जवाबदेही के स्तर पर क्या सुधार दिखाई देता है।
