विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए हटाया गया कब्जा, प्रभावित परिवारों को सेक्टर-30 ईडब्ल्यूएस फ्लैट में शिफ्ट करने का दावा
रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में सोमवार सुबह प्रशासन की बड़ी कार्रवाई ने पूरे इलाके को तनाव और विरोध के माहौल में बदल दिया। महिलाओं के आंसू, ग्रामीणों का हंगामा और चारों ओर बुलडोजर की आवाज के बीच 80 से ज्यादा मकानों को हटाया गया। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि जिन मकानों पर कार्रवाई हुई उनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने करीब 32 मकान भी शामिल बताए जा रहे हैं।

छावनी में बदल दिया गया पूरे क्षेत्र को
जानकारी के मुताबिक कार्रवाई की तैयारी रविवार देर रात से ही शुरू कर दी गई थी। ग्रामीणों के अनुसार देर रात गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया। सुबह जैसे ही जेसीबी और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण विरोध में उतर आए और कई लोग कार्रवाई रोकने के लिए वाहनों के सामने खड़े हो गए। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

यदि जमीन शासकीय और विवादित थी तो सरकारी योजनाओं के तहत मकानों की स्वीकृति और निर्माण कैसे हुआ
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं और कई परिवारों को सरकारी योजनाओं के तहत आवास स्वीकृत कर बनाए गए थे। ऐसे में अब उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाना समझ से परे है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि जमीन शासकीय और विवादित थी तो सरकारी योजनाओं के तहत मकानों की स्वीकृति और निर्माण कैसे हुआ। लोगों का कहना है कि उन्हें भरोसा दिया गया था कि सरकारी आवास मिलने के बाद उनका घर सुरक्षित रहेगा।

कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि मानसून की शुरुआत के समय विस्थापित परिवारों के रहने, मूलभूत सुविधाओं और पुनर्वास की व्यवस्था कितनी तेजी से और किस स्तर पर होगी।
इधर प्रशासन का कहना है कि किसी भी परिवार को बेघर नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स में शिफ्ट किया जा रहा है और वहां आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

विधायक कॉलोनी विकसित की जानी है
गौरतलब है कि शासन की योजना के तहत नकटी गांव की लगभग 55 एकड़ शासकीय जमीन पर विधायक कॉलोनी विकसित की जानी है। पिछले वर्ष भी इसी जमीन पर कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद उसे बीच में रोक दिया गया था। अब दोबारा शुरू हुई कार्रवाई ने पुनर्वास, सरकारी योजनाओं की जवाबदेही और प्रशासनिक प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
